लॉकडाउन बिताया पड़ोसी की बेटियों के साथ

January 8, 2021 | By admin | Filed in: Teacher Ke Saath.

गरम सेक्स की स्टोरी में पढ़ें कि लॉकडाउन में मैं घर पर अकेला था. मेरी पड़ोसन आंटी अपने रिलेटिव के यहां फंस गयी और उनकी बेटियां घर पर अकेली थीं.

दोस्तो, अन्तर्वासना पर मैं आप सबका स्वागत करता हूं. मैं अपनी हिन्दी सेक्स कहानी आप सबके साथ साझा करना चाहता हूं और बता दूं कि यह मेरी सच्ची गरम सेक्स की स्टोरी है।

यह घटना मेरे साथ कुछ दिनों पहले ही लॉकडाउन में घटी थी जब मेरी फैमिली के सभी लोग गांव चले गए थे.

मेरे पड़ोस में एक आंटी रहती हैं. संयोग ऐसा हुआ कि उस वक्त वो भी अपने किसी रिश्तेदार के यहां गयी हुई थी और लॉकडाउन के कारण वहीं पर फंस कर रह गयी.

आंटी की दो बेटियां हैं. एक प्रियंका और दूसरी स्वाति (बदले हुए नाम). बड़ी वाली प्रियंका 24 साल की है और उसका रंग गोरा है. उसका कद 5 फीट 5 इंच है. उसके बूब्स भी बड़े बड़े हैं और उसकी गांड भी उभरी हुई दिखाई देती है।

उसकी छोटी बहन स्वाति है जो कि हाइट में 5 फीट 1 इंच की है. उसकी चूची अभी छोटी ही हैं. उसकी गांड भी ज्यादा मोटी नहीं है. देखने में ठीक है और शरीर से हल्की ही है.

मगर उसकी बड़ी दीदी पूरी चोदू माल है.

आंटी मुझे अच्छी तरह से जानती हैं तो हमारे अच्छे संबंध हैं। जब उन्हें पता चला कि मैं भी शहर में हूं तो उन्होंने मुझसे उनके घर रुक जाने के लिए कहा.

मैं भी मना नहीं कर पाया क्योंकि आंटी की मजबूरी थी और पड़ोसी तो मजबूरी में ही काम आते हैं. इसलिए मैंने उनको तसल्ली दी कि वो चिंता न करें और मैं उनके घर में सब संभाल लूंगा.

अरे, मैं आप लोगों को अपने बारे में तो बताना भूल ही गया!
मेरा नाम आयुष है. उम्र 20 साल है और हाइट 5 फीट 7 इंच है. रंग में गोरा हूं और बॉडी भी अच्छी है.

मुझे प्रियंका पहले से ही पसंद थी. उसके साथ कई बार मेरी बात भी होती थी और हंसी मजाक भी कर लेते थे.
छोटी वाली स्वाति के साथ केवल हाय-हैलो होती थी.

तो दोस्तो, मैं आंटी के घर पहुंच गया. वो दोनों जाते ही खुश हुईं क्योंकि वो भी अकेली थीं और उनको भी अब टाइम पास करने के लिए एक साथी मिल गया था.

उस दिन शाम को हम लोगों में बहुत बातें हुईं. फिर हमने डिनर किया और उसके बाद ऑस्कर विजेता मूवी ‘पैरासाइट’ देखने लगे.
मैं इसको पहले ही देख चुका था.

मुझे पता था कि मूवी के अंदर एक सेक्स सीन भी आयेगा. जब वो सेक्स सीन आया तो तीनों की नजर लैपटॉप स्क्रीन पर ही गड़ी हुई थी.
तीनों ही थोड़े असहज भी हो रहे थे क्योंकि मैं लड़का था और वो दोनों लड़की.

मगर फिर भी तीनों देखते ही रहे. उसके बाद प्रियंका उठी और बाथरूम में चली गयी.
वो दो मिनट के बाद वापस आ गयी. शायद चूत को सहला कर आई थी.

वो मेरे पास ही बैठी थी और मैंने हल्के से उसके हाथ पर हाथ रख दिया.
उसने कुछ नहीं कहा.

फिर मैंने अपनी टांग भी थोड़ी उसकी टांग पर चढ़ा दी. उसने फिर मेरी ओर देखा और इशारे से कहा कि स्वाति देख रही है.

मैंने टेढ़ी नजर की तो उसकी बहन हमें ही देख रही थी.
हम दोनों के बीच में ये छेड़छाड़ देख स्वाति ने दूसरी ओर से मेरा हाथ पकड़ लिया.

मैं तो हैरान हो गया.
अब मुझे लगने लगा कि ये तो दोनों ही तैयार हैं.

समस्या ये थी कि दोनों को एक ही घर में कैसे चोदूं? हालांकि दोनों बहनें आपस में एक दूसरी को ये नहीं जता रही थीं कि वो मेरे साथ मजा लेने के लिए तैयार हैं.

इसलिए स्वाति ने अपना हाथ हटा लिया.

अब प्रियंका भी आराम से बैठ गयी. कुछ देर के बाद प्रियंका अपने फोन में बिजी हो गयी. मैं और स्वाति मूवी देखते रहे.

फिर स्वाति उठकर वॉशरूम में जाने लगी. मैंने इंतजार किया लेकिन वो वापस नहीं आई. फिर न जाने क्यों मेरे मन में ख्याल आया कि कहीं वो मेरी ही इंतजार तो नहीं कर रही?

मैं भी चुपचाप उठकर चला गया.

देखा तो स्वाति वहीं खड़ी हुई थी. हम दोनों की नजरें मिली और वो मेरे पास आकर मेरे गले से लिपट गयी.

मैंने भी उसको बांहों में भरा और उसको चूमने लगा. उसकी गांड दबाकर मैंने उसके होंठों को चूस डाला.

दो मिनट तक ये किस चली और फिर हम अलग हो गये.
मैंने चुपके से उसके कान में कह दिया- यहां पर कुछ करना ठीक नहीं है. प्रियंका को शक हो जायेगा.

ये बोलकर मैं वहां से चला आया और स्वाति वहीं से किचन में चली गयी ताकि प्रियंका को शक न हो.

दस मिनट के बाद स्वाति सबके लिए दूध गर्म करके ले आयी.

हम तीनों ने दूध पीया और फिर स्वाति उठकर अपने रूम में चली गयी.

मैंने प्रियंका से कहा- मैं छत पर टहलने जा रहा हूं. मेरा पेट भारी हो रहा है.
दरअसल ये मेरा उसको छत पर बुलाने का इशारा था.

हुआ भी ऐसा ही.
मुझे छत पर आए हुए पांच मिनट ही हुए थे कि चुपके से प्रियंका भी ऊपर आ गयी और उसने जीने के गेट को बाहर से बंद कर दिया.

इससे पहले कि मैं कुछ बोलता उसने मुझे धकेलते हुए दीवार से सटा लिया और मेरे होंठों को किस करने लगी.

मैंने उसको बांहों में भींच लिया और उसके होंठों को चूसने लगा.
हम दोनों को मजा आ रहा था.

थोड़ी देर किस करने के बाद मैं उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसके चूचों को दबाने लगा.
बहुत ही मोटे चूचे थे उसके. एकदम से भरे हुए और नर्म.

मैंने कस कर उनको भींच डाला. मैं उसकी लोअर में हाथ डालकर उसकी पैंटी पर से चूत को सहलाने लगा. उसके बूब्स को दबाने लगा.

उसके हाथ मेरी पैंट में जाने के लिए आतुर थे.

हम दोनों बाहर खुले में थे इसलिए वहां पर चुदाई नहीं हो सकती थी. उनकी छत पर बने खाली कमरे में हम घुस गये. वह बिना दरवाजे का कमरा था जिसको वो लोग टूटे फूटे सामान को रखने के लिए इस्तेमाल करते थे.

अंदर जाते ही उसने मेरे होंठों को जोर से चूमा और फिर मेरी पैंट खोलने लगी.

उसने पैंट का बटन खोल दिया और मेरी अंडरवियर में हाथ डाल दिया. अब मेरा लन्ड उसके हाथ में था.

मैंने उसकी टीशर्ट और लोअर उतरवा दी. अब वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी. मैंने अपनी टीशर्ट उतार दी और मैं उसके बूब्स ऊपर से दबाते हुए उसकी ब्रा खोल दी.

उसके बड़े बड़े बूब्स नंगे हो गये और उनको इस हालत में देखने मे

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