Hot Chachi Ke Sath Sex

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हॉट चाची के साथ सेक्स कहानी में पढ़ें कि मैं अपनी पड़ोसन को चाची कहता था और उनकी चुदाई का सपना देखता था. एक दिन मेरा सपना साकार हो गया.

मेरा नाम वेलाराम है. प्यार से सब मुझे वेलू बोलते हैं. मैं राजस्थान में रहता हूँ. मेरी उम्र 23 साल है.

ये हॉट चाची के साथ सेक्स कहानी हमारे पड़ोस में रहने वाली रमिला आंटी के साथ मेरी चुदाई की कहानी है.

रमिला चाची की उम्र 38 साल है, लेकिन वह अभी सिर्फ 30 साल की दिखती हैं. चाची का रंग दूध जैसा गोरा है, उनका जिस्म एकदम भरा हुआ और मादक है. चाची का फिगर 36-32-38 का है.

उनके गोल मटोल, बड़े बड़े और कसे हुए मम्मों को देखकर मेरी लार टपकने लगती थी.
ऐसा लगता था कि अभी चाची के मम्मों को मुँह में भरकर इनका सारा दूध निचोड़ लूं और अपना लंड चाची के दोनों मम्मों के बीच में घुसाकर आगे पीछे करके रस झाड़ लूं.

चाची की बड़ी सी गोल मटोल गांड पीछे को उठी हुई है, जो बहुत ही सेक्सी लगती है.

जब चाची चलती हैं, तो उनके पीछे उठे हुए हिलते चूतड़ों को देखकर मेरा लंड एकदम से बेकाबू हो जाता है और मुझे उसको ठंडा करने के लिए तुरंत मुठ मारनी पड़ती है.

मेरा मन बस ये ही सोचता रहता था कि किसी तरह एक बार चाची की गांड दबाने या उस पर लौड़ा रखकर भिड़ाने का मौका मिल जाता, तो मैं अपनी किस्मत को जीवन भर सराहता.

मन में एक ही इच्छा होती थी कि रमिला चाची की गांड में लंड घुसाकर जिंदगी भर पड़ा रहूँ.

मैं भगवान से प्रार्थना करता रहता था कि एक बार रमिला चाची की चूत या गांड मारने का अवसर दे दे, तो जीवन सफल हो जाए.

फिर एक दिन भगवान ने मेरी सुन ही ली.

उस दिन मेरे माता पिता रिश्तेदार के घर मिलने के लिए गए हुए थे. उस दिन मैं अपने घर पर अकेला ही था.

तभी मुझे अलमारी में अपनी फटी हुई कमीज दिखी. मैंने सोचा कि चलो रमिला चाची से सिलवाकर ले आता हूँ.

रमिला चाची के पास सिलाई मशीन है और लोग उनके पास कपड़े सिलवाने आते हैं.

मैं उनके घर गया और फटी हुई कमीज सिलने के लिए दे दी.

उन्होंने कमीज सिलकर दी और मुझे चाय पीकर जाने को बोला.

मैंने कहा- नहीं चाची, आज मम्मी पापा घर नहीं हैं. मुझे घर जाकर खाना बनाने की तैयारी करनी है. चाय फिर कभी पी लूंगा.
रमिला- अगर ऐसा है तो क्यों परेशान होता है, मैं टिफिन भेज दूंगी. तुम्हें तो खाना बनाना भी नहीं आता होगा.

मैं- आप क्यों तकलीफ उठाती हो चाची. मैं किसी तरह बना लूंगा.
रमिला- अरे इसमें तकलीफ कैसी … मैं तुम्हारी चाची हूं. क्या तुम्हारे लिए इतना भी नहीं कर सकती!

मैं- थैंक्यू चाची.
रमिला- ठीक है, तो मैं शाम को तुम्हारे लिए टिफिन ले आऊंगी.

मैं घर आ गया और चाची के आने का इंतजार करने लगा.

करीब शाम 7 बजे रमिला चाची टिफिन लेकर आ गईं.

मैंने कहा- चाची, आप भी मेरे साथ खाओ.
चाची- नहीं वेलू, मैं घर जाकर खा लूंगी. तुम आराम से खाओ.

मैं- नहीं चाची, आपको मेरे साथ खाना ही पड़ेगा. नहीं तो मैं भी नहीं खाऊंगा.
चाची- अरे ऐसे कैसे नहीं खाएगा, मैं तुम्हें अपने हाथ से खिलाऊंगी.

ऐसा कहकर चाची ने खाने का एक कौर उठाया और मेरे मुँह में डाला.
मैंने कौर खाया, साथ में चाची की नर्म नर्म उंगलियों को चूमने का मौका भी मिल गया.

फिर मैंने भी एक कौर उठाया और चाची के मुँह की तरफ किया. चाची ने मेरी उंगलियों को थोड़ा काटते और चूमते हुए कौर खा लिया.
उनकी आंखों से प्यार झलक रहा था.

मैं उन्हें देख कर मुस्कुरा दिया.
चाची- क्यों मुस्कुरा रहा है?
मैंने- चाची, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो.

चाची मुस्कुरा दीं और अगला कौर मेरे मुँह में देते हुए मुझे प्यार से देखने लगीं.
इस तरह एक दूसरे को खिलाते और खाते हुए हमने खाना पूरा किया.

खाना खाने के बाद हम बैठकर इधर उधर की बातें करने लगे.

फिर मैं फ्रिज से जूस की बोतल निकाल लाया और दो गिलासों में जूस भर कर एक गिलास चाची को दे दिया और दूसरा खुद लेकर पीने लगा.

जूस पीकर चाची जाने लगीं, तो मैंने हाथ पकड़कर चाची को बिठाया और उनसे कुछ देर और बैठने को कहा.

चाची- मुझे जाने दो वेलू, रात 9 बजे तक मेरे पति और बच्चे भी आ जाएंगे.
मैं- आपके पति और बच्चे कहां पर गए हैं?

चाची- वो सब एक दोस्त के यहां दावत पर गए हुए हैं.
मैं- आप क्यों नहीं गईं?
चाची- मुझे अकेला रहना पसंद है … तुम्हारी तरह.

ये कहकर चाची मुस्कुराने लगीं और मेरे पास बैठकर हंसी मजाक करने लगीं.

मैं बार बार उनकी बड़ी गांड और बूब्स को देख रहा था.

चाची बोलीं- क्या तुम किसी लड़की को पसंद करते हो?

उनकी इस बात से मैं थोड़ा शर्मा गया और नीचे देखकर मुस्कुराने लगा.

चाची- शर्मा क्यों रहे हो, बताओ न!
मैं- हां एक है, जिसे मैं बहुत चाहता हूँ.

चाची- कौन है वो खुशनसीब?
मैंने फिल्मी स्टाइल में कहा- पहले आप अपनी आंखें बंद कीजिए.

चाची ने आंखें बंद कर लीं और मैंने अपने मोबाइल से उनकी एक पिक ले ली. फिर स्क्रीन उनके सामने कर दी और आंखें खोलने को कहा.

चाची ने जैसे ही आंखें खोलीं, तो खुद को देखकर चौंक गईं.

वो मेरी तरफ देखकर बोलीं- ये तो मैं हूँ!
मैंने कहा- हां चाची … मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ.

ये कहकर मैं उनसे सटकर बैठ गया और उनके हाथ को चूमकर प्रपोज किया.

वो कुछ नहीं बोलीं और मैंने इसे ही उनकी मौन सहमति मान लिया और उनके गाल पर चुम्मी दे दी.

उन्होंने आंखें बंद कर लीं और बोलीं- वेलू, तू भी मुझे बहुत अच्छा लगता है. मेरा पति तो मुझे प्यार ही नहीं करता है.

उनकी बात सुनकर मैंने कहा- चाची, अब तुमको किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है. मैं आपको हर तरह से खुश रखूँगा.

हॉट चाची मेरे सीने से लग गईं.
फिर मैं उनके गाल और होंठों पर चूमने लगा.
वो सिहर गईं और मेरा साथ देने लगीं.

हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर चूमने लगे. मेरे हाथ चाची की पीठ और नितंबों पर फिर रहे थे.

फिर हम दोनों खड़े हो गए और मैंने रमिला चाची को पीछे घुमा दिया.
मैं उनकी मदमस्त गांड पर लंड दबाकर आगे हाथ ले जाकर चाची के मम्मों को दबाने लगा; उनके गाल और गर्दन पर चूमते हुए लंड से गांड पर धक्के मारने लगा.

उनकी मखमली गांड का गर्म स्पर्श पाकर मेरा लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया था.

फिर मैंने हॉट चाची की घाघरी ऊपर उठा दी और पैंटी घुटनों तक सरका दी. अब उनकी गांड मेरे सामने नंगी हो गयी थी.

चाची की मस्त चिकनी और मुलायम गांड देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया और मैं घुटनों के बल बैठकर रमिला चाची के चूतड़ों को चाटने लगा. मैंने अपनी जीभ चाची की गांड की दरार में डाल दी और गुदगुदी करते हुए चाटने लगा.

चाची गुदगुदी और मस्ती के मारे कामुक आहें निकाल रही थीं और अपनी गांड मेरे मुँह पर दबाती जा रही थीं.

फिर मैंने चाची की घाघरी का नाड़ा खोलकर उसे उतार दिया और चाची की पैंटी भी उतार कर अलग कर दी. वो मस्ती से मेरी तरफ देखने लगी, तो मैंने चाची का ब्लाउज भी खोल दिया. चाची मेरे सामने नंगी हो गई थीं.

अब मैंने चाची को बिस्तर पर चित लिटाया और उनके मम्मे दबाने लगा, चूसने लगा.

चाची की चुदास जाग गयी थी और वो बड़ी बेताबी से ‘आह आह्ह उम्म ..’ कर रही थीं.

वो लंड लेने के लिए व्याकुल हो रही थीं. उन्होंने टांगें चौड़ी करके मुझे चूत चोदने का आमंत्रण दिया.

चाची की चूत गीली हो रही थी. उनकी चुत की अंदरूनी गुलाबी रंगत देखकर मेरा लंड उछलकर खड़ा हो गया और चूत में घुसने के लिए तैयार हो गया.

लेकिन मैं चाची को और तड़पाना चाहता था. इसलिए मैंने अपने वासना से तपते होंठ उनकी चूत पर रख दिए और आइसक्रीम की तरह चूसने लगा.
जिससे चाची की वासना जाग गयी और वो मेरा मुँह चूत पर दबाकर नीचे से गांड उठाकर चूत चटवाने का आनन्द लेने लगीं.

मैं मलाई की तरह उनकी प्यारी चूत को चाट रहा था और जीभ नुकीली करके छेद में घुसाकर गुदगुदी करते हुए चाटने लगा था.
इससे चाची सिहरती हुई एक लंबी आह भरकर रह जातीं.

कुछ देर मैंने चाची की प्यारी फुद्दी चाटी और फिर उसका रस निकल गया. मैंने पूरा रस चाटकर पी लिया. चाची की चूत से निकला नमकीन रस पीने में मुझे बहुत मजा आया.

फिर मैंने अपनी निक्कर और अंडरवियर उतार दी और तना हुआ 7 इंच का लंड हॉट चाची के हाथ में दिया और मुँह में लेने को कहा.

चाची ने पहले कभी लंड मुँह में नहीं लिया था, इसलिए वो मना करने लगीं.
मैंने भी जोर नहीं दिया.

चाची हाथ से मेरे लंड को सहलाने लगीं.
चाची के कोमल हाथों के स्पर्श से मेरा लंड पूरी तरह टाइट हो गया था और उसका सुपारा फूल गया था.

एक पल के लिए तो मुझे लगा, जैसे मैं अभी ही झड़ जाऊंगा.
मैंने तुरंत लंड उनके हाथ से छुड़ा दिया.

चाची के हाथ में तो जादू था. उनके हाथ में लंड रगड़वाकर ही मुझे इतना आनन्द आया, तो इनकी चिकनी चूत में लंड डालकर कितना आनन्द आएगा. ये कल्पना करके मैं रोमांचित हो उठा.

मैंने चाची के पैर चौड़े किए और चूत के मुहाने पर लंड रख दिया.
चाची ने चूत के होंठ खोल दिए और मैंने उसी पल एक धक्का दे मारा.

मेरा लंड 2 इंच तक चूत में घुस गया. चाची को दर्द भरा मीठा अहसास हुआ और उनके मुँह से मादक आह निकल गयी.

मैंने एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लंड बुर में उतर गया.

फिर मैं चाची के होंठ चूसते और मम्मे दबाते हुए घपाघप अपना लंड पेलने लगा.

चाची भी गांड उठा उठाकर मजे ले रही थीं और ‘आह्ह आह्ह्ह उम्म्मह ..’ करके कामुक आवाजें निकाल रही थीं.

अब मैं हाथ की कोहनियों के बल थोड़ा ऊपर हुआ और लौड़ा अन्दर बाहर पेलने लगा.

मेरा 7 इंच का लंड पूरा तक अन्दर जा रहा था और बच्चेदानी से टकरा रहा था.
कभी कभी मस्ती में आकर चाची चूत का संकुचन भी कर देतीं, जिससे मैं रोमांचित होकर आनन्द की चरम सीमा तक पहुंचते पहुंचते रह जाता.

कुछ मिनट की चुदाई के बाद जब चाची झड़ने की कगार पर आईं, तो वो मेरी पीठ पर हाथ लपेटकर मुझसे चिपक गईं.
चाची ने अपनी टांगें मेरी कमर में लपेटकर मुझे कस लिया था.

वो चरम आनन्द प्राप्त होने कि लालसा से ओत-प्रोत होकर आंखें बंद करके झड़ गईं.
अब चाची एक ठंडी आह के साथ शिथिल पड़ गयी थीं.

उनकी गर्म योनि के रस का स्पर्श अपने लंड पर पाकर मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गया था.
मैंने चुदाई की रफ्तार दुगुनी कर दी.

हॉट चाची की चूत गीली हो जाने के कारण पच्च पच्च पच्च्च की आवाजें आ रही थीं.

फिर मेरा लंड भी चाची की गीली चूत की गर्मी और चिकनाई को ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर सका और लावा छोड़ने के लिए तैयार हो गया.

मैंने उनके गाल पर चूमते हुए कहा- माल छूटने वाला है.
वो मेरे होंठों पर चुम्मी देकर आंख मारते हुए बोली- मेरी प्यासी मुनिया रानी को ही पिला दो.

मैंने चाची के होंठों और गालों को बुरी तरह चूमते हुए 20-25 दनादन धक्के मारे और मेरे शरीर में मीठी झुरझुरी होने लगी.

मैंने परमानंद से ओत-प्रोत होकर आंखें बंद कर लीं और मेरे लंड ने गर्म गर्म गाढ़े रस का फव्वारा चाची की चुत में ही छोड़ दिया.
मेरे लंड ने पांच छह पिचकारियां मारते हुए चाची की बुर को सींच दिया था.
लंड से वीर्य इतना अधिक निकला था कि चाची की चुत से छलककर बाहर आने लगा था.

चुदाई के बाद मैं और चाची लिपटकर लेट गए और एक दूसरे के अंगों को छूते हुए मजाक मस्ती करने लगे.

चाची की वासना फिर से जागने लगी और वो मेरे लंड पर चूत दबाने लगीं.
कुछ ही देर में मेरा लंड चाची की चूत में दुबारा जाने के लिए तैयार हो गया.

मैंने चाची को घुटनों के सहारे खड़ा करके घोड़ी बनाया और पीछे से लौड़ा चूत में डालकर चोदना शुरू कर दिया.

करीब दस मिनट तक चुदाई करने के बाद मैं झड़ गया और मैंने अपना वीर्य चाची के चूतड़ों पर उड़ेल दिया.

अब 9 बजने वाले थे. चाची ने जल्दी कपड़े पहने और घर के लिए रवाना होने हो हुईं.

तभी उनके फोन की घंटी बजी. देखा तो उनके पति का नंबर था.
चाची डर गईं कि कहीं पति ने घर आकर तो फोन नहीं किया.

उन्होंने फोन उठाया और स्पीकर पर करके बात की.

उनके पति की आवाज आयी- रमिला, आज मैं और बच्चे घर नहीं आएंगे. दोस्त ने बहुत जिद की है इसलिए हम सभी यहीं पर ठहर गए हैं. सुबह आ जाएंगे.
रमिला ने ‘ठीक है …’ कहकर फोन काट दिया और मैं खुशी के मारे उछल गया.

मैंने रमिला चाची को बांहों में भर लिया. मैंने चाची को फिर से नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया.

हम दोनों बिस्तर पर एक दूसरे से लिपटकर चुम्बन करने लगे और प्यार भरी बातें करने लगे.

उस रात को में मैंने कई बार चाची की चुदाई की. मैं हॉट चाची की गांड भी मारना चाहता था लेकिन वो मना करती रही थीं.

पूरी रात मैं अपना लंड रमिला चाची की प्यारी मखमली गांड पर रगड़ता रहा लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी और चाची की गांड कुंवारी ही रह गई.

सुबह चाची अपने घर चली गईं.
उनकी गांड मारने की हसरत मेरे दिल में ही रह गयी.

पर ये क्या कम था कि मेरी ड्रीमगर्ल (स्वप्नसुंदरी) रमिला चाची की चूत मुझे चोदने को मिल गई थी.
मैं इसी से संतुष्ट था.

दोस्तो, ये थी मेरी हॉट चाची के साथ सेक्स कहानी. इस पर मुझे आपके मेल का इंतजार रहेगा.
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