ट्रक ड्राईवर से गांड मरवाई

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हिंदी गे सेक्स स्टोरीज में पढ़ें कि कैसे मैंने अपनी फैक्टरी के गोदाम में एक ट्रक ड्राईवर से अपनी गांड मरवायी. वो मेरी फैक्ट्री में कच्चा माल लेकर आया था.

हैलो फ्रेंड्स, मैं गुजरात के अहमदाबाद से हूँ. मेरी उम्र अभी चालीस साल की है और मैं काफी हट्टा-कट्टा एक माशूक किस्म का मर्द हूँ. तैराकी और साइकिलिंग के अलावा जिम करने का शौक जिस वजह से मैं काफी तगड़ी बॉडी का मालिक हूँ.

मुझे गांड मरवाने और मारने वालों से बड़ा प्रेम है. मुझे टॉप रहना अच्छा लगता है. मेरा मतलब मुझे गांड मारना बहुत पसंद है.

मगर इसके साथ ही मुझमें एक आदत भी है और वो ये कि किसी भी लौंडे या मर्द पर दिल आ जाने के बाद मुझे बड़ी तमन्ना रहती है कि मैं किसी तरह से उसका लंड देख लूं.
एक बार लंड दिख जाए, तो मेरी कोशिश रहती है कि उस लंड को पकड़ का चूस लूं या सहला कर उसकी गांड मार लूं.

जब से होश संभाला है, तब से अब तक मैंने कई लौंडों की गांड मारी है और कई से मरवाई भी है.

जब मैं बीस साल का ही हुआ था, तब पहली बार मैंने अपने कजिन का लंड चूस लिया था.

दरअसल ये हुआ यूं कि मुझे मेरे चचेरे भाई बहुत मस्त लगते थे. मैं उनसे दिन दिन भर बातचीत के बहाने चिपका सा रहता था. उनके साथ बात करते समय मेरा हाथ अक्सर उनके लंड को छूने को लालायित रहता था.

फिर कुछ ऐसा हुआ कि मेरी कामना पूरी हो गई और एक दिन साथ में नहाते वक्त मैंने उनके लंड को पकड़ कर चूस लिया.

वो भी समझ तो गए ही थे, सो उन्होंने भी मुझे घोड़ी बना कर मेरी गांड मार दी.

एक बार जब उनसे गांड मरवा ली, तो मैंने भी उनकी गांड मारी और इस तरह से मैं गांड मरवाने और मारने का शौकीन बन गया.

दिन यूं ही बीतते गए और मुझे आगे आने वाले समय में इंजीनियरिंग करने का मौका मिला और मेरी नौकरी एक प्राइवेट सेक्टर की कम्पनी में लग गई.

मेरा शौक बदस्तूर जारी रहा. मगर अब इतना ध्यान देने लगा था कि अपने काम की जगह गांड मारने वाले कार्यक्रम को विराम दे दिया था. यहाँ मुझे अपनी इज्जत का भी ख्याल रखना जरूरी था.

अभी लॉकडाउन में काफी फुर्सत मिलने के कारण मैं आपको अपनी एक गे सेक्स कहानी लिख रहा हूँ. चूंकि मैं पहली बार कोई सेक्स कहानी लिख रहा हूँ तो गलतियां हो जाना लाजिमी है. प्लीज़ नजरअंदाज करते हुए इस हिंदी गे सेक्स स्टोरी का मजा लीजिए.

जब कामकाज चल रहे थे, तो मैं सारे दिन अपनी फैक्ट्री में काम में व्यस्त रहता था.

फैक्ट्री में आने जाने वाले लोगों पर मेरी निगाह बनी रहती थी, खासकर चिकने लौंडों पर विशेष निगाह रहती थी लेकिन मैं अपनी इज्जत के चक्कर में उनसे कुछ कर नहीं पाता था.

एक दिन फैक्ट्री में एक ट्रक आया. उसमें कम्पनी के लिए कुछ रॉ मैटेरियल आया था.
उस ट्रक का ड्राईवर एक बड़ा ही मस्त चिकना लौंडा था. उसे देखते ही न जाने क्यों मेरा दिल मचल गया और दिल करने लगा कि किसी भी तरह इस लौंडे को नंगा करके उसका लंड देखूँ.

वो लड़का काफी हट्टा-कट्टा था. उसकी उम्र यही कोई 24 साल की रही होगी. बंदा हरियाणा का था तो एकदम चौड़ी छाती वाला गौरवर्ण का था. उसकी बलिष्ठ भुजाओं को देख कर मेरा दिल किसी छमिया की तरह मचल उठा और जैसे एक लड़की किसी मस्त लड़के से चुदने के लिए चुत से रस टपकाने लगती है, ठीक उसी तरह से मेरा दिल उसके लंड के लिए मचल उठा था.

वो ड्राईवर लड़का तीन दिन के लम्बे सफ़र के बाद अहमदाबाद आया था तो काफी थका हुआ था.
उसके बदन पर एक टी-शर्ट थी और नीचे उसे एक लोअर पहना हुआ था.
गर्मी का मौसम था, तो पसीने से उसके कपड़े भीगे हुए थे.

मेरी निगाह उसके नीचे लोअर पर ही लगी हुई थी, जिसमें से मोटा लंड साफ़ दिख रहा था.
मतलब ऐसा एकदम साफ़ लग रहा था कि उसने लोअर के नीचे चड्डी नहीं पहनी हुई थी.

उसके मोटे लंड का उभार देख कर मेरा बदन तपने सा लगा और खून का संचार दुगने से भी ज्यादा हो गया.
मेरी आँखों में उसे पाने चाहत बढ़ गई थी और मन कामुक हो उठा था.

चूंकि मैं टॉप हूँ तो मेरा लंड भी डिंगडाँग करने लगा था.

हालांकि टॉप होने की खासियत ये होती है कि मुझे सामने वाले के चूतड़ पसंद आने चाहिए थे जिससे मैं उसकी गांड मार सकूँ. मगर न जाने क्यों आज बहुत दिन बाद ऐसा लगने लगा था कि मुझे किसी भी तरह इसका लंड देखना है.

मैं उसे घूरने लगा. मेरी निगाह उस लड़के के लंड की तरफ से हट ही नहीं रही थी.

वो मुझे अपनी तरफ घूरता देखता और फिर अपने मोबाइल में कुछ देखने लगता.

फिर मैंने ही उससे पूछा- काफी गर्मी है क्या तुम नहाना चाहते हो?
वो बोला- हां जी साहब, नहाना तो है ही मगर गाड़ी खाली हो जाए, तो बाहर कहीं नहा लूंगा.

मैंने कहा- अरे अभी गाड़ी खाली होने में तो टाइम लगेगा, तुम जब तक नहा आओ.
वो बोला- किधर जाऊं साब … इधर कोई व्यवस्था है?

मैं- हां हां … तुम पीछे चले जाओ, उधर नल लगा है. उधर सभी ट्रक वाले नहाने जाते हैं. तुम भी उधर ही चले जाओ.
वो मेरी बात से खुश हो गया और बोला- ठीक है साब बता दो, नल किधर लगा है?

जिधर नल लगा था, वो जगह एकदम खुली थी. मेरा मन डोलने लगा कि आज उधर ही इसे नहाते हुए देखूंगा. मौका मिल गया तो लंड भी देख लूंगा.

उस समय तक मैं सिर्फ उसका लंड देखने के लिए बेचैन था. उससे गांड मरवाने या उसकी गांड मारने की बात अभी तक मेरे मन में बलवती नहीं हुई थी.

वो गाड़ी के नजदीक गया और अन्दर से अपना तौलिया साबुन ब्रश आदि लेकर मेरे करीब आकर बोला- किधर लगा है नलका साब … बता दीजिए.

मैं उसे पीछे की तरफ ले गया. उधर ज्यादर सुनसान ही रहता था.
उसे उधर ले जाकर मैंने उसे नल दिखाया और नहाने के लिए कह दिया.

उसने मुझसे एक बाल्टी मांगी, तो मैंने उसे बाल्टी दे दी और वो नल के पास खड़ा होकर बाल्टी भरने लगा.

फिर वो तौलिया लपेट कर नंगा हो गया. उसने अपनी टी-शर्ट और लोअर निकाल दिए. उसका जवान मर्दाना शरीर देख कर मेरी आँखें किसी प्यासी रंडी की तरह चमक उठीं.

मेरी पूरी कोशिश थी कि किसी तरह उसके लंड को देख लूं … मगर मेरी ये हसरत पूरी न हो सकी.

वह तौलिया पहन कर ही नहा लिया और अपने बदन को हाथ से झटकार

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